यह विराम पल दो पल का है
कुछ समय कुछ परिस्तिथी का है
क्या दोष इसमें किसी का है ,
ना वक्त का है ना सीमा का है
ना चलती है कश्ती ,
कुछ कागज का है कुछ फुलो का है
यह विराम पल दो पल का ,है
यह विराम पल दो पल का है
कुछ समय कुछ परिस्तिथी का है
क्या सोचने का कारण है ,
ना सपना है ना चिन्ता है
ना रुकती है जिन्दगी,
कुछ बहने का है कुछ बढ़ने का है
कुछ समय कुछ परिस्तिथी का है।
.jpg)
No comments:
Post a Comment