यूँ तो हर कदम पर
जीवन जीने की इच्छा हैं ,
विष को पीने की इच्छा हैं ,
चलती हूँ उन काँटो पर
फूलो पर चलने की इच्छा हैं ,
हर वक्त सोचती हूँ
उस सोच की चाल से बढ़ने की इच्छा हैं ,
लगता है बढ़ तो जाऊँगी
पर इस पथ पर रूकने की इच्छा हैं ,
घबराती हूँ कहने से
पर इसी ऊम्र में जीने की इच्छा हैं,
यूँ तो हर कदम पर
जीवन जीने की इच्छा हैं ,
हर राह पर उस
विष को पीने की इच्छा हैं .......

No comments:
Post a Comment